What is Chassis? Types, Advantages, Disadvantages
What is Chassis? Types, Advantages, Disadvantages
चेस्सी (Chassis): चेसिस एक ऑटोमोबाइल का मुख्य ढांचा या “सकेलेटन” होता है। इसे कार का कंकाल भी कहा जाता है। यह गाड़ी की बुनियादी संरचना होती है जिसमें इंजन, गियरबॉक्स, ब्रेक सिस्टम, सस्पेंशन और अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स लगाए जाते हैं।
चेसिस गाड़ी को स्थिरता, मजबूती और सड़क पर सुरक्षा प्रदान करता है। यह भार सहन करने, सभी कंपोनेंट्स को एक साथ रखने और गाड़ी को संचालित करने का काम करता है।
कार के लिए चेसिस मानव शरीर के कंकाल के समान है। चेसिस, जिसे ‘फ्रेम’ के रूप में भी जाना जाता है, किसी भी कार की नींव संरचना होती है जो इसे नीचे से सहारा देती है। चेसिस का उद्देश्य कार के वजन को उसके निष्क्रिय और गतिशील अवस्था में सहन करना है। यह देखते हुए कि, अधिकांश लोगों को अपनी कार के चेसिस का चयन करने का मौका नहीं मिलता है और बहुत से लोग वास्तव में उनकी उतनी परवाह नहीं करते हैं। हालांकि, अगर आपको चेसिस के बारे में कुछ जानकारी है, तो यह आपकी कार की क्षमताओं को निर्धारित करने में मदद कर सकता है। यहाँ दो मुख्य प्रकार के चेसिस हैं।
Ladder Frame Chassis
लैडर फ्रेम चेसिस:
इसकी प्रतिकृति के आकार के नाम पर, लैडर -फ्रेम चेसिस सबसे पुराने चेसिस प्रकारों में से एक है। इस चेसिस की विशेषता दो लंबे भारी बीम हैं । आसानी से निर्मित होने की इसकी गुणवत्ता ने न केवल इसे समकालीन रूप से लोकप्रिय बना दिया बल्कि इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन का रास्ता भी आसान कर दिया। चूंकि लैडर फ्रेम चेसिस काफी भारी है, इसलिए इसका उपयोग आमतौर पर भारी सामग्री को ले जाने वाले वाहनों के लिए किया जाता है।
भारत में लोकप्रिय गाड़ियाँ:
Toyota Fortuner, Mahindra Thar, Ford Endeavour, Force Gurkha, Mahindra Alturas G4, Mercedes AMG G63 आदि।
फ़ायदे:

- निर्माण में आसान और उस पर कार को आसानी से असेम्बल करना।·
- भारी और मजबूत तन्य शक्ति।
कमियां:
- कमजोर मरोड़ वाली कठोरता के कारण खराब कॉर्नरिंग क्षमता
- इसका भारीपन इसे प्रदर्शन कारों और हैचबैक के लिए उपयुक्त नहीं बनाता है।
Monocoque Chassis/मोनोकोक चेसिस
मोनोकोक फ्रेंच शब्द है जिसका अर्थ “सिंगल शेल” होता है। यह यूनिबॉडी स्ट्रक्चर है जिसमें चेसिस और बॉडी एक ही इकाई में बने होते हैं। आजकल ज्यादातर आधुनिक कारों में यही इस्तेमाल होता है।
फायदे:
- बेहतरीन टॉर्सनल रिगिडिटी (मरोड़ने की क्षमता)
- हल्का और सुरक्षित (क्रैश में बेहतर प्रोटेक्शन)
- अच्छी हैंडलिंग और कॉर्नरिंग
- मरम्मत अपेक्षाकृत आसान
कमियां:
- दुर्घटना में पूरा फ्रेम प्रभावित हो सकता है
- छोटे पैमाने पर उत्पादन महंगा
- भारी सामान ढोने के लिए कम उपयुक्त
चेसिस का वर्गीकरण:
इंजन की फिटिंग के अनुसार चेसिस का वर्गीकरण इस प्रकार है:

- पूर्ण आगे/. Full forward: फुल फॉरवर्ड चेसिस वह है जिसमें इंजन को कारों और पुराने टाटा-ट्रकों की तरह ड्राइवर केबिन या सीट के बाहर फिट किया जाता है। इस प्रकार की व्यवस्था में चालक की सीट अगले पहिये से दूर होती है और वह वाहन के ठीक सामने देख नहीं पाता है।
- अर्ध-आगे/ Semi forward: सेमी-फॉरवर्ड चेसिस में, इंजन का आधा हिस्सा ड्राइवर के केबिन में होता है और शेष आधा बाहर होता है। यह ड्राइवर को सड़क की बेहतर दृश्यता प्रदान करता है।
- बस चेसिस./ Bus Chassis: बस चेसिस में पूरा इंजन ड्राइवर केबिन में लगा होता है। यह वाहन में अधिक फर्श प्रदान करता है। ड्राइवर की सीट अगले पहिये के ठीक ऊपर है और वह अगले पहियो से ही सामने की पूरी सड़क देख सकता है। अधिकांश वाहनों में इंजन चेसिस के सामने वाले भाग में लगा होता है। केवल मेटाडोर वाहनों में आगे के पहियों को ड्राइव दी जाती है।
- पीछे इंजन. Engine in Back.:टाटा और अशोक लीलैंड बसों की तरह इंजन को चेसिस के पिछले हिस्से में भी लगाया जा सकता है। इस व्यवस्था के लिए लंबे प्रोपेलर शाफ्ट की आवश्यकता नहीं है। गियरबॉक्स और डिफरेंशियल को एक इकाई में संयोजित किया गया है।
- केंद्र में इंजन./. Engine at centre: इंजन को चेसिस के केंद्र में भी लगाया जा सकता है। यह व्यवस्था उपयोग के लिए चेसिस फर्श की पूरी जगह प्रदान करता है।
वाहनों में लगे पहियों की संख्या तथा चलाने वाले पहियों की संख्या के अनुसार वाहन के चेसिस निम्न प्रकार के होते हैं:
(ए) 4 X2 ड्राइव चेसिस वाहन – इसमें 4 पहिए होते हैं जिनमें से 2 पहिए ड्राइविंग पहिये होते हैं।
(बी) 4 X4 ड्राइव चेसिस वाहन – इसमें 4 पहिये होते हैं और ये सभी पहिए ड्राइविंग करते हैं।
(सी) 6 X2 ड्राइव चेसिस वाहन – इसमें 6 पहिये होते हैं जिनमें से 2 पहिये ड्राइविंग पहिये होते हैं।
(डी) 6 X4 ड्राइव चेसिस वाहन – इसमें 6 पहिए होते हैं जिनमें से 4 पहिए होते हैं ड्राइविंग पहिये होते हैं।
चैसिस फ्रेम्स के लिए उपयोग होने वाले स्टील सेक्शन के प्रकारों की बात करते हैं। वाहनों और मोटरसाइकिलों के चैसिस फ्रेम्स का निर्माण करने के लिए कई प्रकार के स्टील सेक्शन का उपयोग होता है। ये निम्नलिखित हो सकते हैं:
- एचबी (H-Beam): यह सेक्शन एक H आकार का होता है और फ्रेम को ताकत और स्थिरता प्रदान करने के लिए उपयोगी होता है। इसे आमतौर पर ट्रक्टर और बड़े वाहनों के चैसिस फ्रेम्स में प्रयोग किया जाता है।
- चैनल सेक्शन: चैनल सेक्शन वाला स्टील एक प्रमुख चैसिस फ्रेम बनाने का प्रमुख विकल्प है। इसमें दोनों ओर एक या एक से अधिक छोर वाले रेल के साथ चैनल के आकार का उपयोग किया जाता है। यह लंबे चैसिस वाहनो में उपयोगी होता है।
- Box Section बॉक्स सेक्शन : बॉक्स सेक्शन को शोर्ट मेम्बर के तोर पर इस्तेमाल किया जाता है।
- Tubular Section टुबुलर सेक्शन : इस सेक्शन का प्रयोग साइकिलों, और मोटरसाइकिलों के लिए किया जाता है।
चेसिस पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के भार (Loads)
- स्थिर भार (Static Load) – गाड़ी का अपना वजन + यात्रियों का भार
- गतिशील भार (Dynamic Load) – चलते समय टर्न, ब्रेकिंग आदि से
- विभाजित भार (Distributed Load) – इंजन, टैंक, बैटरी आदि का समान वितरण
- अचानक भार (Shock Load) – गड्ढे, धक्का आदि
चेसिस किसी भी वाहन की रीढ़ की हड्डी की तरह है। सही चेसिस चुनने से गाड़ी की मजबूती, सुरक्षा, हैंडलिंग और लोड कैपेसिटी प्रभावित होती है। SUV और ऑफ-रोड गाड़ियों में लैडर फ्रेम जबकि सेडान, हैचबैक और ज्यादातर आधुनिक कारों में मोनोकोक चेसिस का इस्तेमाल होता है।